छोटे दलों को जीत के लिए बड़े दलों से गठबंधन जरूरी

प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में सभी छोटे दल सत्ता में भागीदारी के लिए जोड़-तोड़ में जुटे हैं। यह सही भी है लेकिन राजा भैया को छोड़ कर छोटे दलों को जीत के लिए बड़े दलों से गठबंधन या समर्थन जरूरी है। राजनीतिक अस्थिरता के दौर में कभी छोटे दल 1 और 2 सीट पाने के बाद भी सरकार बनवाने के लिए बड़े दलों से सौदेबाजी करते थे लेकिन 2007 के बाद बहुमत सरकारों में छोटे दलों की जीत बड़े दलों के साथ मिलने से ही हो रही है।

            भारत निर्वाचन आयोग के आकड़ों का विश्लेषण करें तो 2007, 2012, 2017 तथा 2022 चार बहुमत की सरकारों में छोटे दल चुनाव लड़े जरूर, लेकिन उन्हें अपेक्षाकृत सफलताएं नहीं मिली। जिन छोटे दलों ने बड़े दल के साथ समझौता किया, उन्हें अप्रत्याशित रूप से सफलता मिली।

जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक)

उत्तर प्रदेश में नवगठित जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) जिसके मुखिया रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) हैं। यह प्रदेश के एकलौते नेता हैं, जिन्हें विधानसभा चुनाव जीतने के लिए किसी बड़े दल के साथ गठबंधन की आवश्यकता नहीं है। राजा भैया 1993 से लगातार कुंडा विधानसभा सीट से विधायक हैं और रिकॉर्ड मतों से जीतते हैं। उनका प्रभाव सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र बाबागंज में भी है। जहाँ से जिसे चाहते हैं, वह विधायक जीतता है। इन दोनों सीटों पर लगातार 1993 से 2022 तक राजा भैया का कब्ज़ा बना हुआ है। राजा भैया 1993 से लेकर 2017 तक एक निर्दलीय के रूप में चुनाव जीते। पहली बार 2022 में नवगठित जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) से विधायक चुने गए हैं।

अपना दल (एस) ​

2022 के विधानसभा चुनाव में अपना दल (एस) ने भाजपा–एनडीए गठबंधन के तहत 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और 12 सीटों पर जीत दर्ज की। लोकसभा 2024 में भाजपा से समझौते का लाभ लेते हुए पार्टी ने 1 सीटें जीतीं और अनुप्रिया पटेल सांसद बनकर केंद्र में मंत्री बनीं। उनके पति आशीष पटेल विधान परिषद सदस्य हैं। इससे पहले 2017 विधानसभा चुनाव में अपना दल (एस) ने भाजपा से 11 सीटों पर समझौता किया था, जिसमें उसने 1% से भी कम वोट पाकर 9 सीटें जीतीं और 2 पर दूसरी स्थान पर रही। 2012 में अपना दल (एस) ने 76 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें केवल 1 सीट जीती, 69 सीटों पर जमानत जब्त हो गई और मात्र 0.9% वोट मिले। 2007 में पार्टी ने 39 सीटें लड़ी थीं लेकिन खाता नहीं खुला था।

 #    YearContestantsWonFDVotesVotes %
120221712014,93,1811.62%
2201711908,51,3360.98%
32012761696,79,1990.90%
42007390305,51,6431.10%

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी)

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की स्थापना 27 अक्टूबर 2002 को हुई थी। स्थापना के बाद अपेक्षित सफलता नहीं मिली। 2007 में 97 सीटों पर और 2012 में 52 सीटों पर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन दोनों बार पार्टी का खाता नहीं खुला। दोनों चुनाव के बाद राजभर जान गये कि बड़े दलों के साथ तालमेल के बिना चुनाव जीत पाना मुश्किल है। इसलिए 2017 में भाजपा के साथ समझौता किया। 8 सीटों पर चुनाव लड़ा और 4 सीटें जीती। भाजपा सरकार में मंत्री भी बने, लेकिन सरकार में तालमेल ना होने के कारण भाजपा सरकार से इस्तीफ़ा दिया। 2022 में सपा गठबंधन में 19 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 सीटें जीतीं और चुनाव में लगभग 1.36% मत प्राप्त किए। बाद में गठबंधन तोड़ कर एनडीए में शामिल हुए और वर्तमान में योगी सरकार में मंत्री हैं।

  #    YearContestantsWonFDVotesVotes %
12022196512,52,9251.36
220178406,07,9110.70%
32012520484,77,3320.60%
42007970944,91,3470.90%

निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी)

निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) की स्थापना 16 अगस्त 2016 को हुई थी। स्थापना के बाद 2017 में पार्टी ने 72 सीटों पर चुनाव लड़ा, मात्र 1 सीट जीती और 70 पर जमानत जब्त हो गई थी। 2018 लोकसभा उपचुनाव में, संजय निषाद ने अपने बेटे प्रवीण निषाद को समाजवादी पार्टी के टिकट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर से चुनाव लड़ाया और 21,000 वोटों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इसके बाद भाजपा ने उन्हें अपने साथ जोड़ा, और 2019 में प्रवीण निषाद भाजपा से संत कबीर नगर से सांसद बने। 2024 में लोकसभा चुनाव हार गये। 2022 विधानसभा चुनाव में संजय निषाद भाजपा से गठबंधन किया। 10 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 पर जीत हासिल की। संजय निषाद वर्तमान में योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

  #    YearContestantsWonFDVotesVotes %
1202210608405840.91%
22017721705405390.62%

राष्ट्रीय लोकदल

राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) की स्थापना 1996 में चौधरी अजीत सिंह ने की थी। स्थापना के बाद जब रालोद लोकसभा और विधानसभा चुनाव अकेले लड़ा  तो अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन जब बड़े दलों के साथ समझौता किया तो लोकसभा और विधानसभा में सीटें जीतती रही। रालोद का जाटलैंड में काफ़ी प्रभाव है, किंतु जब यह अकेले चुनाव लड़ते हैं तो उम्मीद के अनुसार सफलता नहीं मिलती। वहीं, जब बड़े दलों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ते है तो जीत हासिल होती है। 2002 में भाजपा से गठबंधन किया  38 सीटों पर लड़ा और 14 सीटें जीतीं। 2007 में अकेले 254 सीटों पर लड़े, लेकिन केवल 10 सीटें जीत सकी और 222 पर ज़मानत ज़ब्त हुई। 2012 में कांग्रेस के साथ समझौते के तहत 46 सीटों पर चुनाव लड़े और 9 सीटें जीतीं। 2017 में अकेले 277 सीटों पर चुनाव लड़ा, 1 सीट जीती और 266 पर ज़मानत ज़ब्त हुई। इस बार रालोद का वोट शेयर लगभग 1.5% रहा। 2019 में जयंत चौधरी लोकसभा चुनाव हार गए। 2022 में सपा के साथ गठबंधन में रालोद ने 33 सीटों पर चुनाव लड़ा और 8 सीटें जीतीं, साथ ही लगभग 3% वोट शेयर हासिल किया। लोकसभा चुनाव में रालोद एनडीए में शामिल हो गई और 2 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें उसके 2 सांसद विजयी हुए। वर्तमान में जयंत चौधरी केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं।

#    YearContestantsWonFDVotesVotes %
12022338326,30,1682.85%
22017277126615,45,8101.80%
320124692017,63,3542.30%
420072541022219,29,6313.70%
5200238141213,32,8102.50%

लोकसभा

#    YearContestantsWonVotes %
12024220.14
22019300.24
32014800.13
42009750.44
520041030.63
61999720.37
7199880

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM)

एआईएमआईएम की स्थापना मूल रूप से मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन 1927 में नवाब बहादुर यार जंग, हैदराबाद राज्य के नवाब महमूद नवाज खान किलेदार द्वारा की गई थी। एआईएमआईएम मुख्य रूप से हैदराबाद की पार्टी है। यह मुस्लिम बहुल्य विधानसभा सीटों पर तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और बिहार में चुनाव लड़ती है। बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव में 5 विधानसभा की सीटें जीती है। एआईएमआईएम मुस्लिम की सियासत करने वाले कांग्रेस सहित क्षेत्रीय दलों को नुकसान पहुंचाते है जिसका लाभ भाजपा को मिलता है। असादुदीन ओवैसी एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ओवैसी पहली बार 2004 में हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए थे। कई छोटे दलों से समझौता करके चुनाव भी लड़ा लेकिन आपेक्षित सफलता नहीं मिली। किसी बड़े दल से समझौता नहीं किया है।

2017 में AIMIM ने उत्तर प्रदेश में 38 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें 37 पर जमानत जब्त हुई थी और मात्र 0.24% वोट मिला था। 2022 में, ओवैसी ने हिंदू जाति-आधारित छोटे-छोटे दलों को साथ लेकर चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन उन्हें गठबंधन में विशेष सफलता नहीं मिली। AIMIM ने अंततः 94 सीटों पर प्रत्याशी उतारे और सिर्फ एक सीट मुबारकपुर पर जमानत बची, बाकी सभी पर जमानत जब्त हो गई। कुल मिलाकर AIMIM को पूरे प्रदेश में लगभग 0.49% वोट मिला, जो 2017 से थोड़ा अधिक था, उम्मीद के मुताबिक कोई बड़ी चुनावी सफलता नहीं मिल पाई। 2027 में भी ओवैसी उत्तर प्रदेश में काफी सक्रियता के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में जुटे हैं। 

  #    YearContestantsWonFDVotesVotes %
12022940934,50,9290.49%
22017380372041420.24%

आम आदमी पार्टी (आप)

आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थापना 26 नवम्बर 2012 को दिल्ली में हुई थी। दिल्ली में अप्रत्याशित सफलता मिली और तीन बार सरकार बनाया। पंजाब में सरकार बनाई। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में “दिल्ली मॉडल” और भ्रष्टाचार-निर्मूलन एजेंडे के दम पर अपनी पहचान बनाने का प्रयास किया। उन्होंने शुरुआत में 403 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया, लेकिन अंततः 349 सीटों पर ही उम्मीदवार उतारे लेकिन खाता नहीं खुला और पूरे प्रदेश में उनका वोट मात्र 0.38% रहा।

  #    YearContestantsWonFDVotesVotes %
120223490349347,1870.38%

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया

शिवपाल सिंह यादव (प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया), सपा के कद्दावर नेता शिवपाल सिंह यादव ने अखिलेश यादव से मतभेद होने के कारण 2018 को प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया की स्थापना की। 2019 में लोकसभा चुनाव में 47 सीटों पर लड़ें और लगभग आधा प्रतिशत मत मिले। 2 सीटें फिरोजाबाद और बासगांव में तीसरे स्थान पर रहे। सपा और बसपा के समझौते के बाद भी शिवपाल सिंह यादव अपने बड़े भाई राम गोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव को चुनाव हराने में सफल रहे। 2019 में भाजपा के चन्द्रसेन को 46.06 और सांसद चुने गए। दूसरे स्थान पर सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी अक्षय यादव रहे, जिन्हें 43.38% मत मिले। जबकि शिवपाल सिंह यादव को 8.53% मत मिले। भाजपा को 4,95,819 और अक्षय यादव को 4,67,038 मत मिले थे। शिवपाल सिंह को 91,869 वोट मिले थे। अगर शिवपाल सिंह चुनाव नहीं लड़ते तो अक्षय यादव की जीत निश्चित थी। विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर शिवपाल अपने पुराने घर समाजवादी पार्टी में वापस आ गये। वह विधायक हैं, बेटा आदित्य यादव बदायूं से सांसद है।

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