कांग्रेस पार्टी
(राजीव से राहुल-प्रियंका तक)
राजीव से राहुल युग तक (1985-2022)
प्रदेश में 1952 से लेकर चन्द वर्षों को छोड़कर 1989 तक निरन्तर कांग्रेस की सरकार रही है। 1989 के बाद गैर कांग्रेसी दौर की शुरुआत हुई जो 36 वर्षों बाद भी जारी है। इन 36 वर्षों में 1989, 1991, 1993, 1996, 2002, 2007, 2012, 2017 एवं 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस में निरन्तर गिरावट आयी। सत्ता से बाहर होने के बाद 1989 में 94 सीट और 27.9 प्रतिशत मत पाने वाली कांग्रेस 2012 तक पहुंचते-पहुंचते 28 सीट एवं 11.69 प्रतिशत वोट पर सिमट कर रह गयी। 2017 में कांग्रेस ने एक बार फिर सपा से गठबंधन किया। जिसका परिणाम यह रहा कि कांग्रेस को मात्र 6.25% वोट और 7 सीटों पर सिमट के रह गयी। 2022 में कांग्रेस को मात्र 2 सीट और 2.33% मत मिले। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के कमजोर होने के पीछे जातीय व धार्मिक ध्रुवीकरण तथा संगठन की कमजोरी और बसपा से 1996 एवं सपा से 2017 में गठबंधन तथा मुलायम सरकार को समर्थन देना प्रमुख कारण माना जाता है। 2027 में भी कांग्रेस की स्थिति बहुत अच्छी नहीं दिख रही है। कांग्रेस के उत्थान पतन का विस्तृत विश्लेषण “ieda.in” में दिया गया है।
