बहुजन समाज पार्टी
(कांशीराम से मायावती तक)

बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम ने राजनीतिक सूझ-बूझ से दलित चेतना के साथ-साथ चुनावी और सत्ता गठबंधन करके पार्टी को आगे बढ़ाया। जिसका परिणाम यह रहा कि 2007 में मायावती के नेतृत्व में पहली बार 206 सीट पाकर बसपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी, लेकिन 2012 के चुनाव में बसपा को सपा से शिकस्त मिली। बसपा के बढ़ते ग्राफ पर विराम लग गया। 2012 में 25.91 प्रतिशत मत पाकर मात्र 80 सीटों पर सिमट गयी। बसपा का राजनीतिक सफर देखें तो 1989 में 9.41 प्रतिशत मत 13 सीट, 1991 में 9.44 प्रतिशत मत 12 सीट, 1993 में सपा समझौता के साथ 11.12 प्रतिशत मत एवं 67 सीटें जीतने में सफल रही। सपा गठबंधन टूटने के बाद बसपा ने 1996 में कांग्रेस से चुनावी गठबंधन किया और बसपा को 19.65 प्रतिशत मत तथा 67 सीटें जीती। 2002 विधानसभा चुनाव में अकेले लड़कर 23.19 प्रतिशत मत और 98 सीटें जीती। 2017 में बसपा सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ी, लेकिन उसे 22.23 % मत एवं मात्र 19 सीटें मिली। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन और भी कमजोर रहा, पार्टी को सिर्फ 12.88 प्रतिशत मत मिले और वह केवल 1 सीट जीतने में सफल रही। 2024 लोकसभा चुनाव में बसपा का खाता तक नहीं खुला, जबकि 2019 में सपा के गठबंधन में 10 सीटें जीती थी। बसपा के राजनीतिक सफ़र का विस्तृत विश्लेषण “ieda.in” पर दिया गया है।

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