समाजवादी पार्टी
(मुलायम से अखिलेश तक)
समाजवादी पार्टी की स्थापना 4 अक्टूबर 1992 को हुई। इसके बाद पार्टी में काफी उतार चढ़ाव आये। 1991 में अयोध्या विवाद के कारण हाशिये पहुंचे मुलायम सिंह यादव ने सपा गठन के बाद राजनीतिक कुशलता से 2012 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी। 1991 में मुलायम सिंह जनता दल विभाजन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर सिंह की पार्टी सजपा से चुनाव लड़े थे तब 30 सीट एवं 12.54 प्रतिशत मत मिले थे। सपा के गठन के बाद बसपा से चुनावी तालमेल करके मुलायम सिंह यादव ने 1993 में चुनाव लड़ा और गठबंधन की सरकार बनायी। 1993 में सपा 264 सीटों पर चुनाव लड़ी और 17.82 प्रतिशत मत तथा 109 सीटें जीती। 1996 में 110 सीटें और 21.8 प्रतिशत मत तथा 2002 में 25.38 प्रतिशत मत और 141 सीटें जीती। बसपा-भाजपा गठबंधन टूटने के बाद 2003 में मुलायम सिंह यादव ने जोड़-तोड़ करके तीसरी बार सरकार बनायी और चार वर्षों तक सरकार चलायी। 2007 में हुए चुनाव में सपा को करारी शिकस्त मिली। बसपा पहली बार 2007 में 206 सीटे जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी और सपा 97 सीट तथा 25.45 प्रतिशत मतों पर सिमट गयी। 2012 में पहली बार सपा ने 224 सीटें और 29.15 प्रतिशत मत के साथ अखिलेश यादव के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी। 2017 में काँग्रेस से गठबंधन के बाद भी अखिलेश यादव को करारी शिकस्त मिली। सपा 21.42 मतों के साथ 47 सीटों पर सिमट गई। इस चुनाव में काँग्रेस गठबंधन के कारण सपा 311 सीटों और काँग्रेस 105 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। सपा एवं काँग्रेस समझौते के बाद भी 13 सीटों पर दोनों दलों के प्रत्याशी चुनाव मैदान में आमने-सामने रहे। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने मजबूत वापसी करते हुए 32.06 प्रतिशत मत प्राप्त किए और 111 सीटें जीतीं, लेकिन बहुमत से दूर रह गई। 2024 लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस गठबंधन ने भाजपा को करारी शिकस्त दी। सपा 37 सीटें और कांग्रेस को 6 सीटें मिली जबकि भाजपा को 2024 लोकसभा चुनाव में मात्र 33 सीटें ही मिली। 2027 में भाजपा और सपा के बीच सीधी लड़ाई होने की सम्भावना है। मुलायम से अखिलेश तक की सियासत का विस्तृत विश्लेषण “ieda.in” में दिया गया है।
